बिहार की सियासत में बजट सत्र के बीच राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) के प्रदेश प्रवक्ता मनीष यादव ने नेता प्रतिपक्ष पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया है—
“जब सदन में रहते ही नहीं हैं, तो नेता प्रतिपक्ष का दायित्व छोड़ क्यों नहीं देते?”
बजट सत्र को बताया अहम मंच
मनीष यादव ने मीडिया में जारी बयान में कहा कि विधानसभा का बजट सत्र केवल औपचारिक कार्यवाही नहीं, बल्कि राज्य की तरक्की, जनकल्याण और नीतिगत दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे समय में नेता प्रतिपक्ष का लगातार गैरहाज़िर रहना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
परोक्ष रूप से राजद पर निशाना
उन्होंने परोक्ष रूप से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस या सियासी बयानबाज़ी तक सीमित नहीं हो सकती।
नेता प्रतिपक्ष का पद कोई राजनीतिक रसूख का जरिया नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ को सदन में बुलंद करने की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
“नैतिक आधार पर इस्तीफा दें”
मनीष यादव ने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर पा रहा है, तो उसे नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए, ताकि कोई सक्रिय और जवाबदेह प्रतिनिधि यह जिम्मेदारी संभाल सके।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार के विकास, युवाओं के रोजगार, शिक्षा सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत संरचना जैसे मुद्दों पर गंभीर बहस आवश्यक है। ऐसे समय में विपक्ष की अनुपस्थिति लोकतंत्र की भावना को आहत करती है।
अंत में अपील
जदयू प्रवक्ता ने नेता प्रतिपक्ष से सदन में उपस्थित होकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की। साथ ही कहा कि यदि ऐसा संभव नहीं है तो सियासी नैतिकता के तहत पद छोड़ देना चाहिए, ताकि विपक्ष अपनी प्रभावी भूमिका निभा सके।
बजट सत्र के बीच यह बयान बिहार की राजनीति में नए सियासी टकराव का संकेत दे रहा है।















