दक्षिण भारत का प्रसिद्ध राज्य केरल अब आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ कहलाएगा—ऐसी चर्चा तेज है, क्योंकि केंद्र सरकार ने राज्य का नाम बदलकर ‘Keralam’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव पहले राज्य सरकार की ओर से भेजा गया था, जिसे अब केंद्रीय स्तर पर स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि, अंतिम रूप से नाम परिवर्तन के लिए संवैधानिक प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।
क्या है पूरा मामला?
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि राज्य का आधिकारिक नाम अंग्रेज़ी में ‘Kerala’ से बदलकर ‘Keralam’ किया जाए। इससे पहले अगस्त 2023 में भी ऐसा प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी संशोधन सुझाए थे। संशोधित प्रस्ताव के बाद अब केंद्र ने इसे मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था कि मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा ‘केरलम’ कहा जाता है। इसलिए राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को मान्यता देने के लिए यह बदलाव आवश्यक है।
नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
‘केरलम’ शब्द मलयालम भाषा की मूल अभिव्यक्ति है। राज्य के गठन (1 नवंबर 1956) के बाद से ही मलयालम भाषी समुदाय के लिए संयुक्त केरल की अवधारणा रही है। हर वर्ष 1 नवंबर को ‘केरल पिरावी दिवस’ मनाया जाता है।
नाम की उत्पत्ति को लेकर कई ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताएं भी हैं—
- ‘केर’ (जल) और ‘अलम’ (भूमि) से ‘केरलम’ का अर्थ “जल से निकली भूमि” माना जाता है।
- ‘केरा’ का अर्थ नारियल और ‘आलम’ का अर्थ स्थान—इस तरह ‘केरलम’ का अर्थ “नारियलों की भूमि” भी बताया जाता है।
- मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेखों में ‘केरलपुत्र’ शब्द का उल्लेख मिलता है।
- चेरा वंश के संदर्भ में ‘चेरालम’ से ‘केरलम’ शब्द विकसित होने की थ्योरी भी दी जाती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और क्षेत्रीय भाषा के सम्मान का प्रतीक है।
संवैधानिक प्रक्रिया क्या होगी?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य का नाम बदलने के लिए संसद में विधेयक पारित करना आवश्यक होता है। प्रक्रिया इस प्रकार होगी—
- केंद्र सरकार संसद में नाम परिवर्तन विधेयक लाएगी।
- राष्ट्रपति की अनुशंसा ली जाएगी।
- संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित होगा।
- संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाएगा।
इसके बाद ही आधिकारिक रूप से राज्य का नाम ‘केरलम’ हो जाएगा।
राजनीतिक संदर्भ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही भाजपा के लिए केरल रणनीतिक रूप से अहम राज्य है। वहीं राज्य की वामपंथी सरकार का कहना है कि यह फैसला राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है।
क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?
नाम परिवर्तन लागू होने के बाद सरकारी दस्तावेजों, आधिकारिक पत्राचार, केंद्र और राज्य के रिकॉर्ड में ‘Kerala’ की जगह ‘Keralam’ लिखा जाएगा। हालांकि, आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर इसका सीधा प्रभाव सीमित ही रहेगा।
निष्कर्ष
‘केरल’ से ‘केरलम’ का प्रस्ताव केवल एक अक्षर जोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह भाषा, इतिहास और सांस्कृतिक गौरव से जुड़ा कदम है। अब निगाहें संसद की प्रक्रिया पर टिकी हैं। संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी होते ही देश के नक्शे पर यह राज्य आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ कहलाएगा।


















