नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर दुनिया भर में ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। इसके चलते महंगाई के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट संकट का वैश्विक असर
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे वैश्विक आपूर्ति पर पड़ता है। हालिया तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज उछाल आया है।
हांगकांग में सबसे महंगा पेट्रोल
Hong Kong इस समय दुनिया में सबसे महंगे पेट्रोल का सामना कर रहा है। यहां पेट्रोल की कीमत लगभग 15.6 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है। वहीं United States में भी 2022 के बाद से ईंधन की कीमतें अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ा दबाव
तेल की कीमतों में इस तेजी का सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर पड़ रहा है, क्योंकि ये देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी निर्भर हैं। लगातार बढ़ती कीमतों से लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग लागत में इजाफा हो रहा है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा और गहरा गया है।
चीन पर निर्भर हांगकांग
हांगकांग की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा China से पूरा होता है। करीब 80% तेल चीन से आता है, जिससे आपूर्ति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट का तनाव लंबा खिंचता है तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
आम जनता पर असर
हालांकि हांगकांग में केवल 8.4% लोगों के पास निजी वाहन हैं, लेकिन ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ वाहन मालिकों तक सीमित नहीं है। परिवहन महंगा होने से खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है, जिससे आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा।
सरकार की निगरानी, लेकिन राहत नहीं
हांगकांग के मुख्य कार्यकारी John Lee ने तेल की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई है और कहा है कि सरकार बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हालांकि, अब तक उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है।
सार्वजनिक परिवहन बना सहारा
हांगकांग में महंगे ईंधन, ऊंची पार्किंग फीस और भारी रजिस्ट्रेशन शुल्क के कारण ज्यादातर लोग सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं। यही वजह है कि बढ़ती कीमतों के बावजूद शहर की परिवहन व्यवस्था अभी संतुलित बनी हुई है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार कितने संवेदनशील हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और आम लोगों की जिंदगी पर और गहरा पड़ सकता है।

















