नई दिल्ली/गंगटोक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय सिक्किम दौरे पर राज्य के 50वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छता और सांस्कृतिक एकता की खुलकर सराहना की।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सिक्किम पहुंचते ही उन्हें एक अलग ऊर्जा और उत्सव का माहौल महसूस हुआ। उन्होंने राज्य को “पूर्व का स्वर्ग” बताते हुए यहां की हरियाली, शांति और आध्यात्मिक वातावरण की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि सिक्किम जैसे राज्य देश की विविधता में एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
🇮🇳 ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का उदाहरण
पीएम मोदी ने कहा कि सिक्किम ने अपने आयोजन के जरिए पूरे देश को एक मंच पर लाकर “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की झलक पेश की है। उन्होंने युवाओं में देशभक्ति और एकता के भाव को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण की सराहना
प्रधानमंत्री ने सिक्किम की साफ-सफाई की तारीफ करते हुए कहा कि यहां की सड़कें और वातावरण दोनों ही बेहद स्वच्छ हैं। उन्होंने राज्य के लोगों को प्रकृति का सच्चा संरक्षक बताया और इसे पूरे देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण कहा।
‘अष्टलक्ष्मी’ के रूप में पूर्वोत्तर
अपने संबोधन में पीएम ने पूर्वोत्तर राज्यों को भारत की “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार “एक्ट ईस्ट” नीति के साथ-साथ “एक्ट फास्ट” के दृष्टिकोण से भी यहां विकास कार्यों को गति दे रही है।
कनेक्टिविटी और पर्यटन पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सिक्किम की सबसे बड़ी ताकत उसकी पर्यटन क्षमता है। उन्होंने बताया कि राज्य में सड़कों और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि पर्यटन को और बढ़ावा मिल सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
स्थानीय लोगों से जुड़ाव
पीएम मोदी ने सिक्किम के लोगों की सादगी, विनम्रता और गर्मजोशी की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों से मिलना हमेशा उन्हें सुकून देता है और यह अनुभव उनके लिए खास रहता है।
सिक्किम के 50वें राज्यत्व वर्ष का यह आयोजन न केवल राज्य के विकास की यात्रा को दर्शाता है, बल्कि पूरे देश के लिए एकता, स्वच्छता और प्राकृतिक संतुलन का संदेश भी देता है।


















