अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
तेल की कीमतों में तेजी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईंधन बचाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से पेट्रोल और डीजल का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने को कहा ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। पीएम मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए सोलर एनर्जी, इथेनॉल ब्लेंडिंग और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात कही। उनका कहना है कि भारत को धीरे-धीरे पारंपरिक ईंधनों पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी।
इस बीच देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है।
कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 105.45 रुपये और डीजल 92.02 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 100.80 रुपये और डीजल 92.39 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु में पेट्रोल 102.92 रुपये और डीजल 90.99 रुपये प्रति लीटर है।
हैदराबाद देश के उन शहरों में शामिल है जहां ईंधन की कीमतें सबसे अधिक हैं। यहां पेट्रोल 107.41 रुपये और डीजल 95.65 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं अहमदाबाद में पेट्रोल 94.56 रुपये और डीजल 90.25 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
बिहार की राजधानी पटना में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। यहां पेट्रोल 105.18 रुपये और डीजल 92.04 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। दूसरी ओर पोर्ट ब्लेयर में देश के मुकाबले सबसे कम कीमत देखने को मिल रही है, जहां पेट्रोल 82.46 रुपये और डीजल 78.05 रुपये प्रति लीटर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर आम लोगों के घरेलू बजट से लेकर परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक देखने को मिल सकता है। ऐसे में सरकार और आम जनता दोनों स्तर पर ईंधन बचत और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर जोर बढ़ता दिखाई दे रहा है।


















