ढाका: बांग्लादेश में आम चुनावी अभियान की शुरुआत हिंसा और झड़पों के बीच हुई है। राजधानी ढाका सहित कई जिलों में सत्ताधारी आवामी लीग (Awami League) और विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के समर्थकों के बीच हुई झड़पों में कई लोग घायल हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं।
कैसे भड़की हिंसा
दरअसल, विपक्षी BNP ने चुनाव आयोग और सरकार से मांग की थी कि आगामी आम चुनाव एक तटस्थ अंतरिम सरकार के तहत कराए जाएं, ताकि मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके।
शनिवार को इसी मांग को लेकर हजारों कार्यकर्ता ढाका की सड़कों पर उतरे थे। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव बढ़ गया।
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलाईं, वहीं प्रदर्शनकारियों ने पथराव और आगजनी की।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
सरकार का दावा: विपक्ष ने जानबूझकर हिंसा भड़काई ताकि चुनाव प्रक्रिया को अस्थिर किया जा सके।
BNP का आरोप: शांतिपूर्ण रैली को पुलिस ने बर्बरतापूर्वक दबाया और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
इस हिंसा ने चुनावी माहौल में तनाव बढ़ा दिया है और विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस हिंसा पर चिंता जताई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि राजनीतिक दमन और असहमति पर कार्रवाई से बांग्लादेश में लोकतंत्र की साख पर सवाल उठ सकते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में यहां चुनावों के दौरान हिंसा और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी के कई मामले सामने आ चुके हैं।
क्या हो सकता है आगे
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार और विपक्ष के बीच संवाद नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
फिलहाल पुलिस और अर्धसैनिक बलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है, जबकि चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।
निष्कर्ष
चुनावी अभियान की शुरुआत में ही हुई इस हिंसा ने बांग्लादेश के लोकतांत्रिक माहौल पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार और विपक्ष बातचीत के जरिए स्थिति को संभाल पाते हैं या यह टकराव और बढ़ेगा।


















