बेगूसराय।
प्रस्तावित सिलीगुड़ी–पटना–वाराणसी हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) कॉरिडोर में बेगूसराय को शामिल नहीं किए जाने की खबर पर पूर्व मध्य रेल दैनिक रेल यात्री संघ ने कड़ा विरोध जताया है। संघ ने इसे क्षेत्रीय असमानता को बढ़ावा देने वाला और औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण जिले की उपेक्षा बताया है।

संघ के संस्थापक सह महासचिव राजीव कुमार ने बयान जारी कर कहा कि बेगूसराय बिहार की औद्योगिक राजधानी के रूप में जाना जाता है और पटना के बाद सर्वाधिक राजस्व देने वाले जिलों में इसकी गणना होती है। ऐसे में बुलेट ट्रेन जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में संभावित स्टॉपेज से बेगूसराय को वंचित रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय विकास के संतुलन के सिद्धांत के विपरीत है।
राजीव कुमार ने गुजरात के धोलेरा मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां औद्योगिक विकास के साथ विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी सुनिश्चित की गई है। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद 1950 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने बेगूसराय को औद्योगिक नगर के रूप में विकसित करने के लिए गंगा पर रेल-सह-सड़क पुल और राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़कर मजबूत आधार तैयार किया था।

संघ का आरोप है कि दशकों से बेगूसराय रेल उपेक्षा का शिकार रहा है। आज भी यहां से कोलकाता के लिए सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध नहीं है, जबकि कई महत्वपूर्ण लंबी दूरी की ट्रेनें बिना रुके गुजर जाती हैं। यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए हाथीदह, मोकामा या बरौनी जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।
यात्री संघ ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों से सड़क से लेकर संसद तक एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि बेगूसराय की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
अजय शास्त्री की रिपोर्ट















