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बिहार विधानसभा में बड़े ऐलान: पंचायत प्रतिनिधियों को 60 दिन में हथियार लाइसेंस, नए जिलों के गठन पर रोक

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गृह विभाग से जुड़े मुद्दों पर सदन में व्यापक चर्चा हुई। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत प्रतिनिधियों को हथियार लाइसेंस देने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब मुखिया, प्रमुख सहित पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों को गन लाइसेंस जारी करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाएगी।

दिनारा विधायक आलोक सिंह के सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने स्वीकार किया कि लाइसेंस जारी करने में अनावश्यक देरी की शिकायतें मिल रही हैं। इसे देखते हुए गृह विभाग जल्द ही नए दिशा-निर्देश जारी करेगा। नए प्रावधान के तहत आवेदन मिलने के बाद अधिकतम 60 दिनों के भीतर लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पंचायत प्रतिनिधियों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।


नए जिलों के गठन पर सरकार का रुख स्पष्ट

विधानसभा में नए जिलों और अनुमंडलों के गठन की मांग पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी। मंत्री विजय चौधरी ने सदन में कहा कि फिलहाल राज्य में किसी नए जिले के गठन का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।

पारू विधायक शंकर प्रसाद के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रशासनिक ढांचे में बदलाव को लेकर सरकार की कोई योजना नहीं है। इस बयान से उन इलाकों को झटका लगा है, जहां लंबे समय से नए जिले बनाए जाने की मांग चल रही थी।


बजट सत्र में हंगामा, अपनी ही सरकार पर बरसे जीवेश मिश्रा

बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा ने अपनी ही सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने थाना भवनों की स्थिति, पुलिस कर्मियों के आवास और महिला सिपाहियों के लिए बैरक निर्माण में हो रही देरी पर सरकार को घेरा।

जीवेश मिश्रा ने कहा कि सरकार दावा करती है कि कई थाना भवन जर्जर नहीं हैं, तो फिर उनकी मरम्मत के लिए छह-छह लाख रुपये की राशि क्यों दी गई? उन्होंने इस पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

इस पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि जिन भवनों की मरम्मत के लिए राशि दी गई है, उनकी स्थिति की जांच कराई जाएगी। यदि कहीं लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

महिला सिपाहियों के लिए बैरक निर्माण में देरी के मुद्दे पर भी उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की समीक्षा की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, जीवेश मिश्रा लगातार ठोस कार्रवाई की मांग करते रहे। अंत में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं जीवेश मिश्रा के साथ जाकर संबंधित मामलों का निरीक्षण करेंगे।


सदन में इन मुद्दों पर हुई बहस ने साफ कर दिया कि आगामी दिनों में प्रशासनिक सुधार, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के सवाल राजनीति के केंद्र में रहेंगे।

पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट

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