बिहार विधानसभा में मंगलवार को किसानों की फसल बर्बादी से जुड़े नीलगाय के मुद्दे पर एक अलग ही बहस देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान जब कई विधायकों ने नीलगाय द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने को लेकर सवाल उठाए, तो सरकार की ओर से इसके नियंत्रण को लेकर जवाब दिया गया। इसी बीच उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन में एक खास और संवेदनशील अपील रखी।
उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि नीलगाय शब्द का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसकी जगह ‘घोड़परास’ या ‘नील बकरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने स्पीकर प्रेम कुमार और सदन के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि भविष्य में विधानसभा की कार्यवाही में नीलगाय शब्द के स्थान पर वैकल्पिक शब्दों का प्रयोग किया जाए।
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि वे स्वयं भी पहले कृषि मंत्री रह चुके हैं और किसानों की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने बताया कि नीलगाय किसानों के लिए एक गंभीर समस्या रही है और इसके नियंत्रण के लिए पूर्व में प्रयास भी किए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘नीलगाय’ शब्द बोलने से कई लोगों की धार्मिक और भावनात्मक भावनाएं जुड़ जाती हैं, इसलिए विवाद और संवेदनशीलता से बचने के लिए ‘घोड़परास’ और ‘नील बकरी’ जैसे शब्दों का प्रयोग अधिक उपयुक्त होगा।
सदन में इस अपील के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया। माना जा रहा है कि सरकार अब इस जानवर के नियंत्रण के साथ-साथ शब्दावली को लेकर भी सतर्कता बरतना चाहती है, ताकि किसी वर्ग की भावनाएं आहत न हों और किसानों की समस्या पर बिना विवाद के समाधान निकाला जा सके।















