नाबार्ड के साथ एमओयू, सस्ते कृषि ऋण से अन्नदाताओं को आर्थिक संबल
पटना।
बिहार की नीतीश सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी राहत देते हुए एक अहम फैसला लिया है। अब किसानों को कृषि ऋण पर पहले से मिल रहे 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान के अलावा अतिरिक्त 1 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ मिलेगा। इसको लेकर कृषि विभाग और नाबार्ड (NABARD) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह फैसला राज्य के लाखों किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी माना जा रहा है।
इस एमओयू पर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह और बिहार के कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने हस्ताक्षर किए। योजना के तहत राज्य सरकार अपने योजना मद से किसानों को अतिरिक्त 1 प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराएगी।
3 लाख रुपये तक के ऋण पर मिलेगा लाभ
सरकार की इस योजना का लाभ वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों से लिए गए 3 लाख रुपये तक के फसल ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण और अल्पावधि कृषि उत्पादन ऋण पर मिलेगा। हालांकि, यह सुविधा उन्हीं किसानों को दी जाएगी, जो निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने ऋण का भुगतान करेंगे।
2025-26 में 5 करोड़ रुपये का प्रावधान
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन हेतु 5 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। सरकार का उद्देश्य किसानों पर ब्याज का बोझ कम करना और उन्हें समय पर संस्थागत ऋण लेने एवं चुकाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
नाबार्ड को बनाया गया राज्य एजेंसी
योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए नाबार्ड को राज्य एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। नाबार्ड के सहयोग से ब्याज अनुदान की राशि समय पर किसानों तक पहुंचाई जाएगी।
किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि अतिरिक्त 1 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना राज्य के किसानों के लिए आर्थिक संबल का काम करेगी। इससे किसान उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशी, सिंचाई व्यवस्था और कृषि यंत्रीकरण जैसी आधुनिक तकनीकों में निवेश कर सकेंगे। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, गुणवत्ता और किसानों की आय पर पड़ेगा।
आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि नाबार्ड के सहयोग से योजना का पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। यह पहल बिहार सरकार की किसान हितैषी नीतियों, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण समृद्धि को नया आधार मिलेगा।

















