बिहार विधानमंडल का बजट सत्र जारी है। मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल में इथेनॉल फैक्ट्रियों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायकों ने राज्य में इथेनॉल उत्पादन और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कोटे को लेकर चिंता जताई।
पूर्व मंत्री और विधायक श्याम रजक ने बिना किसी कटौती के इथेनॉल उत्पादन की अनुमति देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा इथेनॉल की खरीद के बेहतर आंकड़े सामने आए हैं, जबकि बिहार में सीमित कोटा होने के कारण यहां की फैक्ट्रियों पर संकट मंडरा रहा है। रजक ने चेतावनी दी कि यदि कोटा नहीं बढ़ाया गया तो कई फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार प्रभावित होगा।
उद्योग मंत्री का जवाब
इस पर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने सदन को जानकारी दी कि भारत सरकार के साथ 35.28 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीद का एमओयू हुआ है। उन्होंने बताया कि बिहार की डेडिकेटेड इथेनॉल इकाइयां वर्तमान में प्रतिदिन 1602 लीटर उत्पादन कर रही हैं, जबकि एग्रीमेंट के अनुसार राज्य को 1060 लीटर का ही कोटा आवंटित किया गया है।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से कोटा बढ़ाने की मांग की है और इस दिशा में सकारात्मक पहल की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस समस्या के समाधान की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में खुलने वाली हर फैक्ट्री से सरकार का भावनात्मक जुड़ाव है और सरकार चाहती है कि उद्योगों की आय बढ़े तथा रोजगार के अवसर सुरक्षित रहें।
दिल्ली जाएंगे उपमुख्यमंत्री
मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस मुद्दे को लेकर दिल्ली जा रहे हैं, जहां वे केंद्र सरकार के साथ बातचीत करेंगे।
इथेनॉल फैक्ट्रियों से जुड़े इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई विधायकों ने चर्चा में भाग लिया। सदन में इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
अब सबकी नजर केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी है कि बिहार के इथेनॉल कोटे में बढ़ोतरी होती है या नहीं, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य के उद्योग और रोजगार पर पड़ने वाला है।















