पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक बार फिर सूखे नशे का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। युवाओं के बीच तेजी से फैल रहे नशे के कारोबार को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया और सीमावर्ती जिलों में हो रही कथित गतिविधियों पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने कहा कि राज्य में सूखे नशे का प्रचलन चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। उनका आरोप था कि सीमावर्ती इलाकों से नशीले पदार्थों की तस्करी हो रही है और युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। विपक्ष ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हो रही है और पुलिस प्रशासन इस पर प्रभावी रोक लगाने में पूरी तरह सफल नहीं दिख रहा।
इस पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार सूखे नशे के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। सरकार ने इन इलाकों में एक डीआईजी स्तर के अधिकारी की तैनाती भी की है, ताकि तस्करी और अवैध गतिविधियों पर सख्ती से नियंत्रण किया जा सके।
गृह मंत्री ने कहा कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकने के लिए नारकोटिक्स यूनिट का गठन किया गया है। जहां से भी सूचना मिलती है, वहां तुरंत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेगी और नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
वहीं, विपक्ष ने महिला अपराध, दुष्कर्म की घटनाओं और छात्र-छात्राओं से जुड़े मामलों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि राज्य में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और बेटियां सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। विपक्ष ने इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा गया कि अपराध नियंत्रण और नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। सीमावर्ती जिलों में चौकसी बढ़ाई गई है और आधुनिक तकनीक के माध्यम से निगरानी की जा रही है।
बजट सत्र के बीच कानून-व्यवस्था और नशे का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बना हुआ है। अब देखना यह है कि सरकार के आश्वासनों के बाद विपक्ष का रुख नरम पड़ता है या आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज होता है।















