बिहार की सियासत में एक बार फिर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कथित अवैध संपत्ति को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने लालू प्रसाद और उनके परिवार के नाम पर अर्जित अवैध संपत्तियों को जब्त कर उसे सार्वजनिक हित में उपयोग करने पर सहमति जताई है।
उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार द्वारा अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों को सरकार द्वारा अधिग्रहण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों का उपयोग स्कूल, अनाथालय और छात्रावास खोलने के लिए किया जा सकता है, ताकि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग को इसका लाभ मिले।
जदयू के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि लालू यादव की अवैध संपत्तियों को केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा जब्त किया जाना चाहिए। नीरज कुमार ने कहा कि जिन मकानों और परिसरों को अवैध तरीके से हासिल किया गया है, वहां स्कूल खोले जाएं और अनाथ बच्चों के लिए अनाथालय तथा विभिन्न वर्गों के छात्रों के लिए छात्रावास संचालित किए जाएं।
नीरज कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि आज की तारीख में लालू प्रसाद यादव बिहार के सबसे बड़े जमींदार हैं और उनकी अधिकांश संपत्तियां अवैध तरीके से अर्जित की गई हैं। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से बनाई गई इन संपत्तियों का उपयोग जनता के हित में होना चाहिए।
भाजपा-जदयू नेताओं के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि सत्ताधारी गठबंधन का कहना है कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और सामाजिक न्याय की दिशा में एक जरूरी कदम है।















