महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मंगलवार देर रात एक महत्वपूर्ण सरकारी आदेश जारी कर मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को दिए गए 5 प्रतिशत SEBC (सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) आरक्षण को समाप्त कर दिया है।
क्या था 2014 का फैसला?
यह आरक्षण व्यवस्था जुलाई 2014 में तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नसीम खान के प्रस्ताव पर राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू की गई थी। इसके तहत मुस्लिम समुदाय के कुछ सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 5% आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था।
पात्र लाभार्थियों को जाति प्रमाण पत्र और वैधता प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए गए थे।
अदालत में चुनौती और रोक
इस फैसले को 2014 में अदालत में चुनौती दी गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2014 को अंतरिम आदेश जारी कर राज्य सरकार की नौकरियों में इस आरक्षण पर रोक लगा दी थी। मामला लंबे समय तक विचाराधीन रहा और नीति की कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
सरकार का तर्क क्या है?
राज्य सरकार का कहना है कि जिस अध्यादेश के जरिए यह आरक्षण लागू किया गया था, वह कभी स्थायी कानून में तब्दील नहीं हुआ। अध्यादेश की अवधि समाप्त होने के साथ उससे जुड़े सभी आदेश स्वतः निरस्त हो गए।
इसी आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने 2014-15 के सभी संबंधित परिपत्र और आदेश औपचारिक रूप से रद्द कर दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, नया आदेश अदालत की स्थिति के अनुरूप रिकॉर्ड को अपडेट करने के लिए जारी किया गया है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला संवेदनशील हो सकता है, क्योंकि यह आरक्षण मुस्लिम समुदाय के कुछ पिछड़े वर्गों को शिक्षा और रोजगार में अवसर देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
अब इस निर्णय के बाद राजनीतिक हलकों और समुदाय के भीतर प्रतिक्रिया देखने की संभावना जताई जा रही है।


















