नवादा।
बिहार के नवादा जिले में विकास और जमीन के टकराव ने एक बार फिर उग्र रूप ले लिया है। वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के चैनपुरा गांव में शुक्रवार को उस वक्त हालात बेकाबू हो गए, जब अडानी ग्रुप की इकाई अंबुजा सीमेंट की निर्माणाधीन सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट को 133 केवी हाई वोल्टेज बिजली आपूर्ति देने के लिए पोल और टावर लगाने का काम शुरू किया गया। देखते ही देखते पूरे गांव में हंगामा मच गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि हाई वोल्टेज बिजली लाइन गांव के पश्चिमी हिस्से से जबरन गुजारी जा रही है, जहां उनकी निजी, कीमती और पुश्तैनी आवासीय व कृषि भूमि है। उनका कहना है कि बिना पूरी सहमति और उचित मुआवजे के जमीन पर पोल गाड़े जा रहे हैं, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों के मुताबिक अगर इस इलाके से हाई वोल्टेज लाइन गुजरती है, तो न तो जमीन पर मकान बन पाएगा और न ही खेती संभव रह जाएगी। इससे उनकी जमीन का बाजार मूल्य भी खत्म हो जाएगा और उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
इसी नाराजगी के साथ सैकड़ों ग्रामीण—जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और युवक शामिल थे—मौके पर जमा हो गए और काम बंद कराने की मांग करने लगे। नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात तेजी से बिगड़ गए। ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं और युवा भी शामिल बताए जा रहे हैं। लाठीचार्ज के बाद गांव में दहशत और आक्रोश दोनों फैल गया।
घटना के बाद चैनपुरा गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ग्रामीण इसे ‘जबरन भूमि हड़पने की साजिश’ करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि बड़े कॉरपोरेट घरानों के सामने गरीब किसानों की जमीन और आवाज दोनों को कुचला जा रहा है। गांव में आगे बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है और लोग अपनी जमीन बचाने के लिए सड़क पर उतरने की बात कर रहे हैं।
वहीं, प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए स्थिति पर नियंत्रण होने का दावा किया है। सदर एसडीएम अमित अनुराग ने कहा कि प्रभावित किसानों को सरकारी नियमों के तहत उचित मुआवजा दिया जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। प्रशासन के अनुसार यह परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
यह घटना अडानी ग्रुप की परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर उभर रहे विरोध की एक और कड़ी मानी जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विकास के नाम पर जमीन अधिग्रहण का यह संघर्ष कहां थमेगा और क्या चैनपुरा गांव के लोगों को इंसाफ मिलेगा, या फिर उनकी आवाज हाई वोल्टेज लाइनों के शोर में दबकर रह जाएगी।















