पटना। पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने पटना के एसएसपी को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
यह कार्रवाई मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद की गई। अधिवक्ता ने आयोग के समक्ष दलील दी थी कि छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो गंभीर आपराधिक कृत्य की ओर संकेत करते हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उठे सवाल
मृत छात्रा जहानाबाद की रहने वाली थी और पटना के मुन्नाचक, कंकड़बाग स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान और अन्य परिस्थितियों का उल्लेख होने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। अधिवक्ता का कहना है कि यह सामान्य मौत का मामला नहीं लगता, बल्कि जघन्य अपराध की आशंका से जुड़ा है।
याचिका में अवकाश-प्राप्त न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की गई थी। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी पटना से जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
सीबीआई कर रही जांच
इस मामले की जांच पहले से ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। रविवार को सीबीआई की 20 सदस्यीय टीम, आईजी के नेतृत्व में छात्रा के गांव पहुंची। टीम सुबह करीब 8:40 बजे गांव पहुंची और दोपहर 12:10 बजे तक वहां मौजूद रही।
करीब साढ़े तीन घंटे तक चली पूछताछ में घर के छह सदस्यों—माता-पिता, दादी, भाई, भाई की पत्नी और फुआ—से अलग-अलग कमरों में बयान दर्ज किए गए। जांच टीम अपने साथ लैपटॉप और प्रिंटर भी लेकर पहुंची थी, जिससे मौके पर ही दस्तावेजी कार्रवाई की गई।
आगे क्या?
मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप और सीबीआई जांच के बीच अब इस मामले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। आठ सप्ताह के भीतर एसएसपी की रिपोर्ट और सीबीआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल यह मामला राज्य में कानून-व्यवस्था और छात्र सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस का विषय बना हुआ है।















