पटना: बिहार की राजनीति में मंगलवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मुख्य सचिवालय में कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित की गई। करीब 20 मिनट तक चली इस बैठक को मौजूदा सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक माना जा रहा है।
बैठक में सबसे अहम फैसला वर्तमान सरकार को भंग करने का लिया गया। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर सहमति जता दी, जिसके बाद अब नीतीश सरकार के औपचारिक अंत का रास्ता साफ हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
इस फैसले के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को बदलते सत्ता समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है और अब सभी की निगाहें राज्यपाल के अगले कदम और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पर टिकी हैं।
सूत्रों की मानें तो इस बार सत्ता की कमान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों में जा सकती है। पार्टी की ओर से नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम पर केंद्रीय नेतृत्व की सहमति बन चुकी है।
जानकारी के अनुसार, नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 15 अप्रैल को लोक भवन में आयोजित किया जाएगा, जहां राज्यपाल नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
इससे पहले 14 अप्रैल को भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में शिवराज सिंह चौहान शामिल होंगे। वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के भी पटना पहुंचने की सूचना है।
शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। इस कार्यक्रम को खास बनाने के लिए कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस समारोह में शामिल हो सकते हैं, जिससे इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
कुल मिलाकर, बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। आने वाले कुछ दिनों में राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है, जो आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा और दशा तय करेगा।














