बिहार की सियासत और प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन नए विभागों के गठन का फैसला लिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य मंत्रिमंडल सचिवालय ने विभागों के बीच कार्य बंटवारे की अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का दावा है कि इस प्रशासनिक पुनर्गठन से युवाओं, शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में नीतिगत फैसलों और उनके क्रियान्वयन को नई गति मिलेगी।
सरकार द्वारा गठित तीन नए विभागों में युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और सिविल विमानन विभाग शामिल हैं। यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब विपक्ष राज्य में बेरोजगारी, पलायन और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। ऐसे में इस कदम को न सिर्फ प्रशासनिक सुधार बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग पर खास फोकस, सुनील कुमार को कमान
इस पुनर्गठन का सबसे अहम फैसला उच्च शिक्षा विभाग को लेकर लिया गया है। नवगठित उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी राज्य के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को सौंपी गई है। इसके साथ ही सुनील कुमार के पास अब कुल तीन मंत्रालयों का प्रभार हो गया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अपने भरोसेमंद मंत्रियों पर विश्वास को दर्शाता है, हालांकि यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या एक ही मंत्री इतने व्यापक दायित्वों को प्रभावी ढंग से संभाल पाएंगे।
सरकारी सूत्रों का मानना है कि स्कूल शिक्षा से उच्च शिक्षा को अलग कर सरकार ने विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शोध संस्थानों और तकनीकी शिक्षा पर केंद्रित नीति अपनाने का संकेत दिया है। इसके तहत विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा से जुड़े अधिनियमों का प्रशासन, विश्वविद्यालयों में पुस्तकालयों की स्थापना, केपी जायसवाल शोध संस्थान, एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, जगजीवन राम संसदीय अध्ययन संस्थान, ललित नारायण मिश्र प्रबंधन संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रशासनिक नियंत्रण इसी विभाग के अधीन होगा। इसके अलावा भाषा अकादमियों, विश्वविद्यालय सेवा आयोग, शैक्षणिक पदों की नीति और शोध एवं नवाचार से जुड़े सभी कार्य भी इसी विभाग की जिम्मेदारी में होंगे।
युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग: चुनावी रणनीति या ठोस पहल?
युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी पहल मानी जा रही है। इस विभाग के अंतर्गत रोजगार से जुड़े अधिनियमों और नियमावलियों का निर्माण, रोजगार निदेशालय का गठन, निबंधन प्रणाली का संचालन, रोजगार मेला और ई-पोर्टल का विकास किया जाएगा। निजी कंपनियों, उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों के साथ समन्वय कर युवाओं को रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी।
इसके साथ ही आईटीआई का संचालन, अप्रेंटिसशिप योजनाओं का क्रियान्वयन, केंद्र सरकार की कौशल विकास योजनाओं से समन्वय, बिहार कौशल विकास मिशन से जुड़े सभी कार्य इसी विभाग के जिम्मे होंगे। एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, बिहार युवा आयोग और युवा प्रतिभाओं की पहचान व पोषण जैसे कार्यक्रम भी इस विभाग के दायरे में आएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं पर केंद्रित यह विभाग आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
सिविल विमानन विभाग: बिहार को ‘नई उड़ान’ की तैयारी
सिविल विमानन विभाग के गठन से राज्य में हवाई संपर्क और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर सरकार की दीर्घकालिक रणनीति साफ झलकती है। इस विभाग के तहत राज्य सरकार के वायुयान और हेलीकॉप्टर की खरीद, संचालन और संधारण, एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट का विकास व संचालन, केंद्र सरकार के अधीन एयरपोर्ट से समन्वय, वैमानिकी प्रशिक्षण संस्थानों का नियमन जैसे अहम कार्य शामिल हैं।
जहां विपक्ष इसे चुनावी दिखावा करार दे रहा है, वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन का दावा है कि यह बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी है।
सियासी संदेश और ज़मीनी चुनौती
कुल मिलाकर, तीन नए विभागों का गठन महज प्रशासनिक फेरबदल नहीं बल्कि नीतीश सरकार की बदलती सियासी प्राथमिकताओं का स्पष्ट एलान है। सरकार युवाओं, उच्च शिक्षा और आधारभूत ढांचे को विकास की धुरी बनाकर आगे बढ़ना चाहती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह फैसले कागजों तक सीमित रहते हैं या ज़मीनी स्तर पर वाकई बदलाव की नई इबारत लिखते हैं।
राहुल कुमार की रिपोर्ट















