पटना
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी किसी ताज़ा मामले में नहीं, बल्कि करीब 31 साल पुराने आपराधिक प्रकरण में हुई है, जो पटना के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। लंबे समय से लंबित इस मामले में अदालत में पेश न होने के कारण आखिरकार कानून ने सख्त रुख अपनाया।

जानकारी के मुताबिक शास्त्री नगर थाने में कांड संख्या 552/1995 (जीआर संख्या 775/03) दर्ज किया गया था। इस मामले में 30 अप्रैल 1996 को कोर्ट ने संज्ञान लिया था, जबकि 11 सितंबर 1998 को आरोप तय किए गए थे। इसके बावजूद बार-बार समन और नोटिस जारी होने के बाद भी पप्पू यादव और अन्य आरोपित अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसी आधार पर कोर्ट के आदेश पर अब उनकी गिरफ्तारी की गई है।

इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 1994 से जुड़ी हैं, जब पप्पू यादव पहली बार सांसद बने थे। आरोप है कि पटना में कार्यालय खोलने के उद्देश्य से उन्होंने एक मकान को आवासीय उपयोग के नाम पर किराए पर लिया, लेकिन बाद में उसी मकान को राजनीतिक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करने लगे। मकान मालिक मनोज बिहारी लाल का आरोप है कि कार्यालय चलने के कारण रोज़ाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही होने लगी, जिससे उन्हें और आसपास के लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
मकान मालिक का यह भी कहना है कि कई बार मकान खाली करने का आग्रह किया गया, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्हें अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। इसी मामले में पप्पू यादव के साथ शैलेंद्र प्रसाद और चंद्र नारायण प्रसाद को भी आरोपी बनाया गया है, जिन पर मकान किराए पर लेने की प्रक्रिया में शामिल होने का आरोप है।

इतना ही नहीं, केस में यह आरोप भी शामिल है कि जिस अपार्टमेंट के पांचवें तल्ले पर पप्पू यादव का आवास है, उसकी छत पर उन्होंने अवैध रूप से अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी (जो बाद में कांग्रेस में विलीन हो चुकी है) का कार्यालय बना रखा था। बताया जा रहा है कि यह कार्यालय वर्ष 1994 से ही संचालित हो रहा था। अपार्टमेंट के अन्य किरायेदारों का कहना है कि वर्षों से लगातार भीड़, शोर-शराबा और आवाजाही के कारण उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
आवासीय मकान को कथित रूप से व्यावसायिक और राजनीतिक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल करने से जुड़ा यह मामला पिछले तीन दशकों से अदालत में लंबित था। अब, अदालत के आदेश पर हुई गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।
फिलहाल पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं, जबकि यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि कानून के सामने पद और रसूख आखिर कब तक ढाल बने रह सकते हैं।















