पटना। बिहार विधानसभा परिसर में मंगलवार को स्वर्गीय रामविलास पासवान के सम्मान को लेकर सियासी तापमान फिर चढ़ गया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेताओं और विधायकों ने राष्ट्रीय जनता दल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए धरना दिया।
“दूसरा अंबेडकर” बताकर किया सम्मान
लोजपा (आर) के विधायकों ने पासवान को “दूसरा अंबेडकर” बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर दलितों, वंचितों और गरीबों की आवाज बुलंद की। नेताओं का आरोप था कि राजद की राजनीतिक संस्कृति दलित विरोधी रही है और समय-समय पर दलित नेताओं का अपमान किया जाता रहा है।
धरना दे रहे नेताओं ने कहा कि रामविलास पासवान का अपमान दरअसल दलित समाज का अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजद से सार्वजनिक माफी की मांग
प्रदर्शन के दौरान लोजपा (आर) नेताओं ने नारेबाजी करते हुए राजद से सार्वजनिक माफी की मांग की। उनका कहना था कि पासवान ने केंद्र और राज्य की राजनीति में सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती दी और हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। ऐसे नेता पर टिप्पणी करना दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित है।
विधानसभा परिसर में कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। लोजपा (आर) नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि राजद की ओर से स्पष्ट सफाई या माफी नहीं आती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
क्या है मामला?
दरअसल, हाल ही में विधानसभा में राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने रामविलास पासवान की प्रतिमा विधानसभा परिसर में लगाने की मांग की थी। इसी दौरान अपने संबोधन में उन्होंने पासवान को “बेचारा” कह दिया, जिसे लेकर लोजपा (आर) ने कड़ा ऐतराज जताया है।
इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है और आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

















