Image

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। 90 वर्षीय पाटिल ने महाराष्ट्र के लातूर स्थित अपने आवास ‘देववर’ में अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे पाटिल घर पर ही चिकित्सकीय निगरानी में थे। सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शिवराज पाटिल के निधन पर देशभर में शोक जताया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वे पाटिल के निधन से व्यथित हैं। पीएम मोदी ने उन्हें एक अनुभवी नेता बताते हुए लिखा कि पाटिल ने अपने सार्वजनिक जीवन में विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उल्लेखनीय योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में पाटिल ने उनके आवास पर भेंट भी की थी। उन्होंने शोक की इस घड़ी में परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की और लिखा, “ओम शांति।”

कांग्रेस पार्टी ने भी अपने वरिष्ठ नेता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पाटिल को विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका शांत, संतुलित और मर्यादित राजनीतिक व्यक्तित्व हमेशा याद रखा जाएगा।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र से आने वाले शिवराज पाटिल चाकुरकर का राजनीतिक जीवन अत्यंत प्रभावशाली रहा। वे 1973 से 1980 तक दो बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे और इसी अवधि में विधानसभा के डिप्टी स्पीकर एवं स्पीकर के पद की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद 1980 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे और लगातार छह बार (1984, 1989, 1991, 1996, 1998, 1999) चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली। पाटिल लोकसभा अध्यक्ष के पद पर भी रहे।

उनकी राजनीतिक यात्रा में 2004 लोकसभा चुनाव एक अपवाद रहा, जब वे भाजपा उम्मीदवार रूपाताई पाटिल निलंगेकर से पराजित हो गए। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व में उनका कद हमेशा ऊंचा रहा।

2004 में केंद्र सरकार में उन्हें गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद पाटिल ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस कदम को उस समय राजनीतिक मर्यादा का उदाहरण माना गया।

बीते कुछ महीनों से गंभीर रूप से बीमार चल रहे पाटिल की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और परिवार ने उन्हें घर पर ही चिकित्सकीय देखरेख में रखने का निर्णय लिया था। शुक्रवार सुबह उनकी स्थिति अचानक खराब हुई और उनका निधन हो गया।

देश के राजनीतिक इतिहास में शिवराज पाटिल का योगदान एक अनुभवी, शांत और संतुलित नेता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

Releated Posts

होली पर बरौनी होकर कई स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों को बड़ी राहत

बरौनी (बेगूसराय) में होली के अवसर पर यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने कई स्पेशल…

ByByAjay Shastri Feb 20, 2026

बजट सत्र में कानून-व्यवस्था पर घमासान, राबड़ी–तेजस्वी के निशाने पर सरकार

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन सदन में कानून-व्यवस्था का मुद्दा जोर-शोर से उठा। विधान परिषद…

ByByAjay Shastri Feb 20, 2026

बिहार विधान सभा में IGIMS को लेकर जोरदार बहस, तंज और ठहाके

बिहार विधान सभा के शुक्रवार सत्र में IGIMS में इलाज और बेड उपलब्धता को लेकर जोरदार बहस देखने…

ByByAjay Shastri Feb 20, 2026

पटना में डीएसपी की गाड़ी से टक्कर, रॉन्ग साइड चलने का आरोप

राजधानी पटना में कानून के रखवालों पर ही नियम तोड़ने का आरोप लगने से हड़कंप मच गया। शहर…

ByByAjay Shastri Feb 19, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top