मकर संक्रांति से पहले बिहार की सियासत एक बार फिर लालू परिवार के इर्द-गिर्द गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव का अचानक लालू आवास पहुंचना केवल एक पारिवारिक मुलाकात नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेतों से भरा कदम माना जा रहा है। तेज प्रताप यादव ने पूरे परिवार से मुलाकात कर 14 जनवरी को आयोजित होने वाले अपने “ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज” का औपचारिक न्योता दिया, जिसके बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
लालू आवास पहुंचते ही तेज प्रताप यादव ने सबसे पहले अपने पिता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की। उन्होंने पूरे आदर और अपनत्व के साथ पिता से आग्रह किया कि मकर संक्रांति के अवसर पर वे उनके आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में अवश्य शामिल हों। इसके बाद तेज प्रताप ने अपनी मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया और उन्हें भी भोज में शामिल होने का आमंत्रण दिया।
इस मुलाकात का सबसे अहम राजनीतिक संदेश तब सामने आया, जब तेज प्रताप यादव ने नेता प्रतिपक्ष और अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी व्यक्तिगत रूप से दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया। दोनों भाइयों की यह मुलाकात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बीते कुछ महीनों से उनके रिश्तों में खटास की चर्चा लगातार होती रही है।
तेज प्रताप यादव ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा कीं। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन्होंने पिता, माता और छोटे भाई से मिलकर आशीर्वाद प्राप्त किया और मकर संक्रांति के अवसर पर होने वाले दही-चूड़ा भोज के लिए निमंत्रण पत्र दिया। उन्होंने अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में लेकर खेलते हुए तस्वीर भी साझा की, जिसे सियासी तल्खियों के बीच नरमी और पारिवारिक मेल-मिलाप का संकेत माना जा रहा है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में तेज प्रताप और तेजस्वी यादव आमने-सामने आए थे, जहां दोनों भाइयों के बीच दूरी साफ दिखाई दी थी। इसके बाद पार्टी के अंदरखाने मतभेद और पारिवारिक खींचतान की चर्चाएं और तेज हो गई थीं। ऐसे में करीब सात महीने बाद दोनों भाइयों की यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इधर, तेज प्रताप यादव की राजनीतिक गतिविधियां भी लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में वे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के यहां आयोजित दही-चूड़ा भोज में भी शामिल हुए थे। एनडीए में शामिल होने को लेकर पूछे गए सवाल पर तेज प्रताप ने कहा था कि “वक्त आने पर सब साफ हो जाएगा।” इससे पहले भी एनडीए के कई नेताओं की ओर से उन्हें ऑफर दिए जाने की चर्चाएं सामने आ चुकी हैं।
ऐसे में 14 जनवरी को होने वाला तेज प्रताप यादव का दही-चूड़ा भोज केवल परंपरागत आयोजन नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में आने वाले नए समीकरणों का ट्रेलर बताया जा रहा है। मकर संक्रांति से पहले लालू परिवार के भीतर बढ़ती हलचल और तेज प्रताप यादव की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में बड़े संकेत और फैसले देखने को मिल सकते हैं।

















