कोलकाता/उत्तर 24 परगना।
पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया (SIR) के बाद वोटर सूची में भारी फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। कहीं ससुर पिता बन गए हैं, कहीं घर के मालिक का नाम पिता के रूप में दर्ज है, तो कहीं एक बिल्कुल नया मामला पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट के नारायणपुर इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बांग्लादेशी नागरिक ने अपने पड़ोसी को पिता बताकर न केवल वोटर आईडी और आधार कार्ड बनवा लिया, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने का भी आरोप उस पर लगा है।
पड़ोसी का खुलासा: “वोट देने गया तो पता चला… महबूर मेरा बेटा बन गया”
स्थानीय निवासी जियाद दफ्तर ने इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनका पड़ोसी महबूर दफ्तर, जो मूल रूप से बांग्लादेश के जेस्सोर जिले का निवासी है, करीब 15 साल पहले अवैध रूप से भारत आया था और तब से अपने परिवार के साथ नारायणपुर में रह रहा था।
जियाद ने बताया कि एक साल पहले बैंक से पैसे निकालने के लिए उन्होंने भरोसे में आकर अपने आधार और अन्य दस्तावेज महबूर को दिए थे। लेकिन कुछ महीनों बाद वोट देने गए तो उन्हें पता चला कि महबूर को आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका बेटा दिखा दिया गया है।
जियाद ने कहा—
“महबूर और मैं साथ में काम करते हैं। बैंक काम के लिए मैंने उसे अपना आधार और कागजात दिए थे। वोट देने के समय पता चला कि महबूर मेरा बेटा बन गया है। वो बांग्लादेशी है, कैसे मेरा बेटा दिखा दिया गया?”
प्रशासन को दी शिकायत, लेकिन समाधान नहीं
जियाद के अनुसार, उन्होंने इस मामले की शिकायत स्थानीय स्तर से लेकर BDO ऑफिस तक हर जगह की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई या समाधान नहीं मिला।
उन्होंने कहा—
“मैं हर दफ्तर गया, लेकिन कहीं से जवाब नहीं मिला कि ये गड़बड़ी कैसे हुई। यह बहुत बड़ी चूक है।”
मामले पर राजनीति गरमाई
यह मामला सामने आते ही तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
बीजेपी इसे प्रशासनिक ढिलाई और तृणमूल की ‘शह देकर घुसपैठियों को संरक्षण देने’ की नीति बता रही है, जबकि TMC इसे राजनीतिक साजिश और प्रशासन की सामान्य गलती बताकर बचाव कर रही है।
हाड़ोआ में बड़ी कार्रवाई: बांग्लादेशी परिवार गिरफ्तार
इसी बीच, शुक्रवार को उत्तर 24 परगना जिले के हाड़ोआ के खलीसादी गांव से पुलिस ने एक घुसपैठिए दंपति और उनके बेटे को गिरफ्तार किया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार—
तीनों जेस्सोर, बांग्लादेश के रहने वाले हैं
7 वर्ष पहले अवैध रूप से भारत आए
हाड़ोआ क्षेत्र के ईंट-भट्टों में काम करते थे
संदिग्ध गतिविधियों के कारण पुलिस ने पूछताछ की और उनकी पहचान उजागर हुई
इस कार्रवाई ने वोटर सूची में घुसपैठियों की मौजूदगी और फर्जी पहचान दस्तावेजों की गांभीरता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
SIR के बाद लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां यह संकेत दे रही हैं कि राज्य में मतदाता सूची सत्यापन प्रक्रिया कमजोर पड़ गई है। फर्जी पहचान दस्तावेज बनवाने में घुसपैठिए न केवल सफल हो रहे हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठा रहे हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचता है या नहीं।















