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दहेज उत्पीड़न पर पुलिस का मौन!

FIR के 19 दिन बाद भी मुख्य आरोपी खुले घूम रहे, कार्रवाई न होने से पीड़िता का इंसाफ की उम्मीद टूटी

मुजफ्फरपुर। (करजा थाना क्षेत्र से)
दहेज के लिए क्रूरता और पति की दूसरी शादी की साजिश के सनसनीखेज मामले में करजा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करजा थाना में 08/11/2025 को दर्ज हुई एफआईआर (संख्या 5114022250312/2025) के लगभग 19 दिन बीत जाने के बावजूद, पुलिस ने अभी तक मुख्य आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पीड़िता प्रीति आज भी इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही है, जबकि नामजद अभियुक्त खुलेआम घूम रहे हैं।
यह है पूरा मामला
पीड़िता प्रीति कुमारी ने अपने पति कृष्ण कुमार, सास सुधा देवी सहित कुल चार लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 85 (पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता), आपराधिक बल के प्रयोग और दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज कराया था। प्रीति का आरोप है कि पति कृष्ण कुमार दहेज में ₹5 लाख और एक मोटरसाइकिल की मांग पूरी न होने पर उन्हें गला घोंटकर जान से मारने की धमकी दे रहे थे, और अन्य ससुराल वाले उन्हें घर से निकालने की साजिश रच रहे थे ताकि पति लक्ष्मी कुमारी से दूसरी शादी कर सके।
प्रशासन को आईना: 19 दिनों का लंबा इंतजार
08 नवंबर 2025 को मामला दर्ज होने के बाद, पुलिस ने उपनिरीक्षक कृष्ण कांत मिश्र को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, इतने गंभीर आरोपों के बावजूद, जिनमें जान से मारने की धमकी और दूसरी शादी की आपराधिक साजिश जैसे गंभीर मसले शामिल हैं, पुलिस ने न तो मुख्य आरोपी पति कृष्ण कुमार को गिरफ्तार किया है और न ही सास या अन्य अभियुक्तों से गहन पूछताछ की है।
कानून के जानकारों का कहना है कि बीएनएस की धारा 85 एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें तत्काल गिरफ्तारी और जांच की आवश्यकता होती है, खासकर जब पीड़िता की जान को खतरा हो। ऐसे में पुलिस की यह सुस्त चाल न केवल आरोपियों के हौसलों को बढ़ा रही है, बल्कि कानून के राज पर भी सवाल खड़े करती है।
पीड़िता की सुरक्षा खतरे में
कार्रवाई में हो रही इस देरी से पीड़िता और उसके परिवार में भय का माहौल है। पीड़िता प्रीति कुमारी ने बताया, “एफआईआर दर्ज कराए 19 दिन हो गए हैं, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। मेरे पति और ससुराल वाले खुलेआम घूम रहे हैं। मुझे डर है कि वे मुझे या मेरे परिवार को कोई और नुकसान पहुंचा सकते हैं। क्या प्रशासन मेरे साथ किसी अनहोनी होने का इंतजार कर रहा है?”
पुलिस अधीक्षक (SP) को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और करजा थाना पुलिस को निर्देशित करना चाहिए कि वह तत्काल नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करे और पीड़िता को न्याय सुनिश्चित करे। इस तरह की संवेदनहीनता से पुलिस की छवि धूमिल होती है और महिला अपराधों के खिलाफ सरकार के कड़े रुख पर संदेह पैदा होता है।

पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट

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