पटना। राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा जहानाबाद की रहने वाली 6 जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल में अपने कमरे में बेहोश मिली। छात्रा को तुरंत डॉ. सहजानंद के क्लिनिक लाया गया, जहां से उन्हें आगे रेफर किया गया। 11 जनवरी को छात्रा ने जिंदगी की जंग हार दी। इस घटना के बाद राज्य भर में सियासी पारा हाई हो गया और पुलिस, डॉक्टर सहित कई बड़े चेहरों के शामिल होने की खबरें सामने आई हैं।
मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कानून के मुताबिक, संदिग्ध हालात में मिली छात्रा का मामला मेडिको-लीगल केस माना जाता है। थाना प्रभारी रौशनी कुमारी को 6 जनवरी को ही FIR दर्ज करनी थी, हॉस्टल और कमरे को सील करना था, फोरेंसिक टीम बुलानी थी। लेकिन कमरा खुला छोड़ दिया गया, बिस्तर और कपड़े जब्त नहीं हुए। यह वह “गोल्डन टाइम” था, जब सबूत इकट्ठा किए जाते हैं। पुलिस उस वक्त सुस्त और खामोश रही। तीन दिन तक सीन से पुलिस गायब रही, हॉस्टल का कमरा खुला रहा, जिससे सबूतों से छेड़छाड़ का मौका मिला।
तीन लोगों को हिरासत में लेकर छोड़ दिया गया, लेकिन हॉस्टल की गहन तलाशी नहीं हुई। थाना प्रभारी ने सुसाइड की कहानी गढ़ दी और वही स्क्रिप्ट ASP, SP और SSP तक पहुंचाई गई। SP परिचय कुमार ने बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मीडिया के सामने जजमेंट सुना दिया कि “रेप हुआ ही नहीं।” नींद की गोली और मोबाइल सर्च की कहानी गढ़ी गई, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस दावे को उलट दिया।
पोस्टमॉर्टम में गर्दन, कंधे, चेस्ट पर नाखूनों के निशान, पीठ पर रगड़ से पड़े नीले धब्बे और जननांग पर ताज़ा चोट व टिश्यू ट्रॉमा मिले। मेडिकल ओपिनियन साफ था—forceful penetration हुआ और एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। यह सुसाइड नहीं, बलपूर्वक संघर्ष की कहानी है।
पुलिस ने कहा कि लड़की नींद की गोली से बेहोश थी, जबकि पोस्टमॉर्टम के मुताबिक सभी चोटें मौत से पहले की थीं। कानून और मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार, जब हालात अस्पष्ट हों और जख़्म बोल रहे हों, तो शुरुआती डॉक्टर की जिम्मेदारी होती है कि रिपोर्ट को रिज़र्व रखा जाए। डॉक्टर का काम इलाज और संकेत दर्ज करना है, कानूनी फैसला सुनाना नहीं। लेकिन प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में इस प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। डॉ. सतीश ने रेप की संभावना से इंकार किया। परिजनों ने सवाल उठाया कि जिस कपड़े में लड़की अस्पताल पहुंची वह कहां है।
पुलिस फिलहाल डॉ. सहजानंद से पूछताछ कर रही है। मामले की जांच जारी है और प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर कई सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिल पाए हैं।
















