केंद्रीय बजट 2026-27 के पेश होने से कुछ ही घंटे पहले देश के कमोडिटी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। रविवार को वायदा कारोबार के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में लगभग 9 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। इस तेज टूटन के चलते दोनों कीमती धातुएं अपने निचले सर्किट स्तर तक पहुंच गईं, जिससे निवेशकों में हलचल मच गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का अप्रैल डिलीवरी वायदा शुरुआती कारोबार में 13,711 रुपये यानी करीब 9 प्रतिशत गिरकर 1,38,634 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं चांदी का मार्च डिलीवरी वायदा 26,273 रुपये या लगभग 9 प्रतिशत टूटकर 2,65,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करता दिखा। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1,52,345 रुपये और चांदी 2,91,925 रुपये प्रति यूनिट पर बंद हुए थे।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में सोने और चांदी में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी। इसी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसका सीधा असर वायदा कीमतों पर पड़ा। बजट जैसे बड़े आर्थिक आयोजन से पहले आमतौर पर निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपनाते हैं, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। शुक्रवार को वैश्विक बाजार में सोने का भाव गिरकर 4,713.90 डॉलर प्रति औंस और चांदी का भाव 75 डॉलर प्रति औंस तक आ गया था। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, कमजोर निवेश धारणा और बिकवाली के रुझान ने भारतीय कमोडिटी बाजार को भी प्रभावित किया।
गौरतलब है कि रविवार होने के बावजूद MCX पर ट्रेडिंग खुली रखी गई, ताकि बजट से पहले निवेशक बाजार की दिशा का अनुमान लगा सकें। इस दौरान वायदा कारोबार में दिखी तेज गिरावट ने साफ संकेत दिया कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के ऐलान के बाद सरकार की नीतिगत घोषणाओं, टैक्स संरचना और आर्थिक संकेतों के आधार पर सोने-चांदी की कीमतों में दोबारा तेजी, स्थिरता या सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल बजट से पहले आई यह बड़ी गिरावट निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत मानी जा रही है।

















