बिहार विधान परिषद में युवाओं और बच्चों के बीच बढ़ती नशाखोरी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। इस दौरान सरकार ने भी माना कि ‘सूखे नशे’ (ड्रग्स) के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है और इसे रोकने के लिए बड़े स्तर पर कदम उठाए जाएंगे।
जेडीयू MLC ने उठाया सवाल
जेडीयू के विधान पार्षद रवींद्र प्रसाद सिंह ने परिषद में सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं में सूखा नशा तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित आयोग को और अधिक सक्रिय करने तथा व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि जागरूकता अभियान बड़े पैमाने पर संचालित किया जाए।
सरकार ने स्वीकार की स्थिति
इस पर मंत्री अशोक चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार शराबबंदी और पूर्ण नशाबंदी के लिए संकल्पित है। उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चों और युवाओं में सूखे नशे के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
मंत्री ने बताया कि बैनर-पोस्टर, सोशल मीडिया और मैराथन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। भविष्य में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लेक्चर सीरीज आयोजित करने तथा नशा छोड़ चुके लोगों और नामी हस्तियों को बुलाकर जागरूकता फैलाने पर भी विचार किया जा रहा है।
सीमावर्ती इलाकों और नशा मुक्ति केंद्रों पर सुझाव
इस दौरान सदस्य वीरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि नशाबंदी के बाद सूखे नशे के मामले बढ़े हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को सीमावर्ती राज्यों से वार्ता कर सीमा क्षेत्रों में खुल रही संदिग्ध दुकानों पर रोक लगाने की पहल करनी चाहिए।
खालिद अनवर ने कहा कि अब छोटे-छोटे बच्चे भी सूखे नशे की चपेट में आ रहे हैं और स्कूल छोड़कर नशे की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसे मिशन मोड में लेने की जरूरत बताई।
सैयद फैसल अली ने सीमावर्ती इलाकों में अधिक संख्या में नशा मुक्ति केंद्र खोलने की मांग की।
सरकार ने बड़े अभियान का दिया भरोसा
सभी सदस्यों के सवालों पर मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में नशे के खिलाफ और बड़े स्तर पर मुहिम चलाई जाएगी।















