बेगूसराय जिला न्यायालय में बहुचर्चित ट्रिपल मर्डर केस में बड़ा फैसला सुनाया गया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने मुख्य आरोपी विकास सिंह को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। वहीं अन्य दो आरोपियों रामनिवास यादव और सरिता देवी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार, 4 बीघा जमीन विवाद को लेकर वर्ष 2012 में विकास सिंह ने अपने चाचा अरुण सिंह की हत्या की थी। इसके बाद वर्ष 2017 में चाची मुन्नी देवी की भी हत्या कर दी गई। इन दोनों मामलों में मृतक कुणाल सिंह गवाह थे।
अभियोजन के अनुसार, विकास सिंह अपने भाई कुणाल सिंह पर गवाही नहीं देने का दबाव बना रहा था। जब कुणाल सिंह ने दबाव नहीं माना, तो दीपावली की रात 27 अक्टूबर 2019 को सिंघौल थाना क्षेत्र के मचहा गांव में आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर कुणाल सिंह, उनकी पत्नी कंचन देवी और बेटी सोनम कुमारी की गोली मारकर हत्या कर दी।
चश्मदीद की बची जान
घटना के समय घर से निकलते हुए आरोपी की मुलाकात भतीजे शिवम कुमार से हुई। आरोप है कि विकास सिंह ने शिवम के सीने पर पिस्तौल सटाकर गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन संयोग से गोली नहीं चली, जिससे उसकी जान बच गई। जब शिवम घर के अंदर गया तो उसने अपने पिता कुणाल सिंह, माता कंचन देवी और बहन सोनम कुमारी को खून से लथपथ मृत अवस्था में पाया।

गवाह और सुनवाई
अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी राम प्रकाश यादव ने कई महत्वपूर्ण गवाहों को पेश किया, जिनमें बाबू साहब सिंह, विजय सिंह, डॉक्टर संजय कुमार, मृतक के पुत्र सत्यम कुमार, चश्मदीद शिवम कुमार और अनुसंधानकर्ता मनीष कुमार सिंह शामिल थे।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने विकास सिंह को दोषी पाते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। फैसले के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
यह मामला जिले में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था।
अजय शास्त्री की रिपोर्ट
















