पटना/डेस्क रिपोर्ट।
अशर्फी लाल सिंह की हत्या किसी अचानक भड़के विवाद का परिणाम नहीं थी, बल्कि कई महीनों से simmer हो रहे तनाव, 20 करोड़ की जमीन को लेकर खींचतान और सुनियोजित साजिश का अंतिम अध्याय साबित हुई।
पुराना विवाद, हालिया फैसला और बढ़ता तनाव
परिवार के अनुसार, विवादित जमीन को लेकर नागेश्वर सिंह के घराने से संघर्ष काफी पुराना था। लंबे समय तक अदालत में चली सुनवाई के बाद हाल ही में फैसला अशर्फी लाल के पक्ष में आया। इसी के बाद उन्होंने जमीन पर चारदीवारी खिंचवानी शुरू की।
यही कदम दोनों परिवारों के बीच तनाव को और भड़का गया।
नागेश्वर सिंह की मौत के बाद विवाद उनके दामाद के हाथ में चला गया। इसके बाद रंजिश लगातार गहरी होती चली गई। चार दिन पहले कराई गई सीमांकन दीवार इस संघर्ष की आखिरी चिंगारी बनी।
हमला अचानक नहीं—पूरी योजना के साथ आए थे शूटर
परिवार और गांव वालों का कहना है कि हत्या पूरी तरह पेशेवर सुपारी किलिंग की तरह की गई।
शूटरों ने—
चेहरा छुपाने के लिए फुल-फेस हेलमेट
नंबर प्लेट पर टेप
और पहले से की गई लोकेशन रेकी
का इस्तेमाल किया।
उनके आने-जाने का समय तय, रुटीन की जानकारी पुख्ता और निशाने का चयन बेहद सटीक था। इससे साफ है कि हमला अचानक नहीं, बल्कि पहले से रची गई meticulous प्लानिंग का हिस्सा था।
दोपहर में रूटीन को निशाना बनाया
घटना वाले दिन दोपहर में अशर्फी लाल घर के बाहर रोज़ की तरह बैठे थे। आसपास परिवार के सदस्य मौजूद थे।
इसी रुटीन का फायदा उठाते हुए दो शूटर रामकृष्ण नगर मार्ग से गांव में घुसे और करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका चीख-पुकार और अफरा-तफरी से भर गया।
भागने के दौरान गलती—गांव वालों ने पकड़ी बाइक
वारदात के बाद दोनों अपराधी बाइक से भागने लगे, पर घबराहट में उन्होंने ग़लत रास्ता पकड़ लिया। शायद उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि गांव से बाहर निकलने का दूसरा कच्चा रास्ता भी मौजूद है।
ग़लत मोड़ लेने के बाद ग्रामीणों को उन्हें पकड़ने का मौका मिल गया।
गांव के कई युवक तुरंत उनके पीछे दौड़े। कुछ ही देर में भीड़ जमा हुई और ग्रामीणों ने अपराधियों की बाइक को रोक लिया। यह वही चूक थी जिसने पूरी साजिश का रुख बदल दिया।
पटना से अजय शास्त्री की रिपोर्ट

















