नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच सर्राफा बाजार से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आमतौर पर संकट के समय सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में इस बार भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस अप्रत्याशित बदलाव ने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर बाजार का अगला रुख क्या होगा।
दरअसल, सोमवार 30 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दोनों ही दबाव में नजर आए। सोने की कीमत करीब 1.38 प्रतिशत गिरकर 4,462 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई, जबकि चांदी में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 68.3 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और अनिश्चितता बनी हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब लंबा खिंचता जा रहा है और यह पांचवें सप्ताह में पहुंच चुका है। इस वजह से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। हालांकि आमतौर पर ऐसे हालात में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका है। महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। ब्याज दरें बढ़ने से सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश का आकर्षण कम हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है।
इसी के साथ एक और बड़ा कारण केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की बिक्री भी माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्की के केंद्रीय बैंक ने हाल ही में करीब 60 टन सोना बाजार में बेचा है। यदि अन्य देश भी इसी राह पर चलते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
फिलहाल बाजार के जानकारों का कहना है कि सोना 4,400 से 4,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रहा है और इसमें कमजोरी बनी हुई है। वहीं चांदी 68 से 72 डॉलर प्रति औंस के बीच बनी हुई है। हालांकि निचले स्तर पर कुछ निवेशक खरीदारी जरूर कर रहे हैं, लेकिन बाजार में मजबूत तेजी के संकेत अभी साफ नहीं हैं।
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि इस समय जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें। वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि निवेशक बाजार की स्थिति पर नजर बनाए रखें और लंबी अवधि की रणनीति के साथ आगे बढ़ें।
कुल मिलाकर, सोना और चांदी इस समय दबाव के दौर से गुजर रहे हैं। आने वाले दिनों में इनकी दिशा पूरी तरह से वैश्विक घटनाक्रम, महंगाई और ब्याज दरों के फैसलों पर निर्भर करेगी। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ी समझदारी मानी जा रही है।


















