नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026–27 में श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए केंद्र सरकार ने इस सेक्टर के लिए व्यापक और दूरदर्शी रणनीति की घोषणा की है। माननीय वस्त्र मंत्री द्वारा बजट पर जारी प्रेस ब्रीफिंग में कहा गया कि वस्त्र क्षेत्र रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि, ग्रामीण आजीविका और सतत विनिर्माण में अहम भूमिका निभाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेशा से लेकर फैशन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाने के लिए एक एकीकृत नीतिगत ढांचा प्रस्तुत किया गया है।
बजट में वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है, जिसके तहत पांच प्रमुख उप-घटक शामिल हैं। इनमें राष्ट्रीय फाइबर योजना के माध्यम से रेशम, ऊन, जूट, मानव-निर्मित और नई पीढ़ी के रेशों में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना के अंतर्गत पारंपरिक वस्त्र क्लस्टरों के आधुनिकीकरण, मशीनरी के लिए पूंजी सहायता, तकनीकी उन्नयन और साझा परीक्षण व प्रमाणन केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इससे उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद है।

हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूती देने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम की घोषणा की गई है, जिससे बुनकरों और कारीगरों को लक्षित सहायता मिलेगी और भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत का संरक्षण होगा। वहीं टेक्स-ईको पहल के जरिए पर्यावरण के अनुकूल और वैश्विक मानकों के अनुरूप वस्त्र निर्माण को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
कौशल विकास के क्षेत्र में समर्था 2.0 के तहत उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से आधुनिक कौशल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा, ताकि पूरी मूल्य श्रृंखला के लिए उद्योग-तैयार मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।

बजट में मेगा वस्त्र पार्कों की स्थापना को भी चुनौती मोड में आगे बढ़ाने की घोषणा की गई है। ये पार्क तकनीकी वस्त्रों के विकास को भी समर्थन देंगे, जिनका उपयोग चिकित्सा, रक्षा, औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू की जाएगी, जिससे खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा। इससे ‘एक जिला एक उत्पाद (ODOP)’ को भी मजबूती मिलेगी।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वस्त्र, चमड़ा और समुद्री उत्पादों के निर्यातकों को शुल्क-मुक्त आयातित इनपुट के तहत निर्यात दायित्व अवधि 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है। इससे निर्यातकों को अधिक परिचालन लचीलापन और बेहतर कार्यशील पूंजी प्रबंधन में मदद मिलेगी।
वस्त्र एमएसएमई की तरलता बढ़ाने के लिए टीआरईडीएस को और सशक्त किया गया है। सरकार के अनुसार अब तक इसके माध्यम से ₹7 लाख करोड़ से अधिक की सुविधा दी जा चुकी है। सीपीएसई द्वारा अनिवार्य उपयोग, जीईएम से जोड़ने और ऋण गारंटी जैसे कदम एमएसएमई को मजबूती देंगे।
इसके अलावा, भविष्य के “चैंपियन एसएमई” तैयार करने के लिए ₹10,000 करोड़ का समर्पित एसएमई ग्रोथ फंड भी शुरू किया गया है।
प्रेस ब्रीफिंग में यह भी बताया गया कि कोविड-19 के बाद वस्त्र और परिधान क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। अब तक 1.8 करोड़ से अधिक सिलाई मशीनें जोड़ी जा चुकी हैं, जिससे लगभग 3 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना बनी है। वर्ष 2024–25 में सिलाई मशीनों का आयात 61 लाख तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 भारत को वैश्विक वस्त्र निर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की स्पष्ट रणनीति प्रस्तुत करता है। समावेशी विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ यह बजट वस्त्र क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला माना जा रहा है।
















