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लोहियानगर में पुलिस का खेल!

असली आरोपी खुलेआम, निर्दोष सलाखों के पीछे

बेगूसराय।
लोहियानगर थाना क्षेत्र में कानून नहीं, पुलिस की मनमानी चल रही है। अपहरण और मारपीट जैसे गंभीर मामले में जहां असली आरोपी अब भी आज़ाद घूम रहे हैं, वहीं पुलिस ने एक निर्दोष युवक को बलि का बकरा बनाकर जेल भेज दिया। यह मामला अब सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि न्याय के साथ खुले खिलवाड़ का बन गया है।

सीसीटीवी ने खोली पोल, फिर भी पुलिस अंधी क्यों?

24 दिसंबर 2025 को दर्ज आवेदन के अनुसार 23 दिसंबर की रात एक उजले रंग की टोयोटा कार में तीन लोग युवक सन्नी कुमार को जबरन बैठाकर मारपीट करते हुए ले गए।
सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय गवाहों ने इस घटना की पुष्टि कर दी। इसके बावजूद पुलिस ने फुटेज में दिख रहे लोगों—
मनीष कुमार, पंकज सिंह और राहुल सिंह
पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं दिखाई।

तो फिर गिरफ्तारी किसकी हुई?

पुलिस ने सीधे-सीधे प्रकाश कुमार को उठाया, पूछताछ की और बिना ठोस सबूत के 27 दिसंबर को अदालत भेज दिया
यानी—
असली आरोपी बाहर , निर्दोष युवक जेल में

यह जांच नहीं, खानापूर्ति है

स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यह पूरी कार्रवाई ऊपर के दबाव में की गई खानापूर्ति है, ताकि पुलिस अपनी फाइलें पूरी दिखा सके। सवाल यह है कि

  • जब तीन आरोपी साफ दिख रहे हैं तो एक ही गिरफ्तारी क्यों?
  • क्या रसूखदार होना कानून से बड़ा हो गया है?
  • क्या गरीब और कमजोर ही हमेशा पुलिस की आसान गिरफ्त बनेंगे?
परिवार का फूट पड़ा दर्द

गिरफ्तार युवक के परिजनों ने साफ आरोप लगाया है कि उनका बेटा निर्दोष है और पुलिस ने उसे जानबूझकर फंसा दिया। परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन थाना स्तर पर चुप्पी और बेरुखी ही मिल रही है।

कानून के रक्षक या अपराध के संरक्षक?

यह मामला लोहियानगर पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान है।
अगर सीसीटीवी, गवाह और नामजद आरोपी भी गिरफ्तारी के लिए काफी नहीं हैं, तो फिर न्याय आखिर मिलेगा किसे?

पुलिस का पक्ष

हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर बेगूसराय सदर-1 के डीएसपी आनंद पांडे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पुलिस पर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। डीएसपी ने कहा है कि मामले में एक अभियुक्त की गिरफ्तारी कर उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, तथा पुलिस सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच कर रही है। शेष तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब जनता पूछ रही है सवाल
  • क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
  • क्या असली आरोपी पकड़े जाएंगे?
  • या फिर यह केस भी पुलिस रिकॉर्ड में “निपटाया गया” मान लिया जाएगा?

लोहियानगर की यह घटना एक चेतावनी है—
अगर आज सवाल नहीं उठे, तो कल कोई भी निर्दोष सलाखों के पीछे हो सकता है।

अजय शास्त्री की रिपोर्ट

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