नवादा।
बिहार के नवादा जिले में अपराधियों के हौसले अब इतने बुलंद हो चुके हैं कि आम आदमी का घर से निकलना भी डरावना हो गया है। कुम्हार बीघा गांव में 45 वर्षीय मनोज यादव की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। उनके श्मशान घाट के पास मिलने वाले शव ने इस वारदात की बर्बरता और सुनियोजित प्रकृति को उजागर कर दिया।
रविवार सुबह ग्रामीणों ने श्मशान घाट के पास खून से लथपथ शव देखा, जिसके बाद पूरे इलाके में सन्नाटा और सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की स्थिति देखकर अंदाजा लगाया कि यह केवल हत्या नहीं बल्कि गहरी रंजिश या प्रतिशोध की नृशंस वारदात थी।
क्रूरता की सीमा पार
मृतक के शरीर पर चाकू के कई गहरे निशान पाए गए, जिसमें सबसे घातक वार आंख के बीचों-बीच किया गया था। इसके अलावा अपराधियों ने मनोज यादव के प्राइवेट पार्ट को भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया। ये सभी निशान यह स्पष्ट करते हैं कि यह सुनियोजित और अत्यंत क्रूर हत्या थी।
परिवार पर टूट पड़ा दुख
परिवार के अनुसार, मनोज यादव शुक्रवार शाम लगभग 7:30 बजे घर के निर्माण कार्य के लिए मजदूर बुलाने गए थे, और वह अपने परिवार को आखिरी बार देख कर निकले थे। देर रात तक लौटने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई। सुबह शव मिलने की खबर ने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी।
मनोज यादव के पीछे पत्नी, तीन बेटियां और दो बेटे हैं। परिवार की एक बेटी की शादी भी बाकी थी, जिसकी तैयारियों में मनोज दिन-रात मेहनत कर रहे थे। इस हत्या ने केवल एक व्यक्ति की जान नहीं ली, बल्कि पांच बच्चों और पत्नी के सहारे को हमेशा के लिए छीना।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी, अंचल निरीक्षक और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम और खोजी कुत्तों (Dog Squad) की मदद से साक्ष्य जुटाए गए। अंचल निरीक्षक के.के. अकेला ने कहा कि यह सुनियोजित और अत्यंत क्रूर हत्या है। पुलिस ने आसपास के साक्ष्य सुरक्षित कर संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी है।
हाल के महीनों में नवादा में हत्या, लूट और मारपीट की घटनाओं में तेजी ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों में असुरक्षा और डर फैल गया है, जबकि पुलिस का दावा है कि जल्द आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
इस वारदात ने न केवल नवादा जिले में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि अपराधियों का दबदबा बढ़ रहा है और आम लोग अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
















