पटना के चित्रगुप्त नगर और गांधी मैदान थाना क्षेत्र में स्थित दो अलग-अलग गर्ल्स हॉस्टल से सामने आए मामलों ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदेहास्पद मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया, वहीं दूसरी ओर गांधी मैदान थाना क्षेत्र के सीपी ठाकुर रोड स्थित परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल में एक और नीट छात्रा की आत्महत्या ने कई नई शंकाओं को जन्म दे दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, गांधी मैदान क्षेत्र के परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल में छह जनवरी को एक छात्रा का शव उसके कमरे में पंखे से लटका हुआ पाया गया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि छात्रा को पूर्णिया निवासी एक युवक लगातार परेशान कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। मृतका के परिजनों ने इस घटना को केवल आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पिता ने वरीय पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि हॉस्टल संचालक विशाल अग्रवाल, रंजीत मिश्रा, वार्डेन खुशबू कुमार और हॉस्टल के प्रभारी द्वारा उनकी बेटी को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। परिजनों का यह भी कहना है कि छात्रा की कुछ सहेलियां भी इस मानसिक प्रताड़ना में शामिल थीं, जिससे वह अंदर ही अंदर टूट चुकी थी।
परिजनों की शिकायत के बाद गांधी मैदान थाना पुलिस ने हॉस्टल संचालक, वार्डेन और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा की मौत आत्महत्या के कारण होने की पुष्टि हुई है, लेकिन पुलिस हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। घटना वाले दिन के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि छात्रा पर किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना तो नहीं बनाई गई थी।
उधर, चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदेहास्पद मौत के बाद पहले से ही प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। लगातार दो हॉस्टल मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी पटना में छात्राओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और हॉस्टल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां हैं।
इन घटनाओं के बाद अभिभावकों में भय का माहौल है और छात्रावासों की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं। सवाल यह है कि क्या हॉस्टल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहा है, और क्या छात्राओं की मानसिक स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा?
फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस की जांच जारी है। परिजन न्याय की आस लगाए बैठे हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह तय हो सके कि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था में सुधार होगा या नहीं।
















