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पटना: नीट छात्रा की रहस्यमयी मौत, पुलिस जांच पर सवाल और हाईकोर्ट द्वारा आरोपी की जमानत खारिज

पटना।
बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की रहस्यमयी मौत अब सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल बन चुकी है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई इस मौत के मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद पूरा मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।

तीन दिन की रहस्यमयी देरी और सवालों की झड़ी

छात्रा की मौत 6 से 9 जनवरी के बीच हुई। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने छात्रा के कमरे को सील नहीं किया, जिससे सबूतों की हेराफेरी की संभावना बनी। सवाल उठता है कि इस दौरान पुलिस कहाँ थी और क्या कर रही थी? पुलिस का तर्क है कि परिजन ने तत्काल केस दर्ज नहीं कराया, लेकिन गंभीर स्थिति में पुलिस स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लेती?

पुलिस और हॉस्टल प्रबंधन पर उठ रहे सवाल
  • शंभू गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका नीलम अग्रवाल के बारे में सवाल उठ रहे हैं। क्या उनसे पर्याप्त पूछताछ की गई?
  • जांच से पहले ही एएसपी स्तर पर नींद की गोली के थ्योरी को हवा में उछाल दिया गया। अगर छात्रा ने आत्महत्या की कोशिश की थी, तो कमरे को तुरंत सील क्यों नहीं किया गया?
  • लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि क्या पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश हुई।
आरोपी मनीष रंजन और उसके पिछले रिकॉर्ड

जहानाबाद का मनीष चंद्रवंशी 2020 में पटना आया और महज फोर्थ ग्रेड कर्मचारी से करोड़ों की संपत्ति वाला दबंग बन गया। कोरोना काल में ऑक्सीजन सप्लाई एजेंसी के जरिए उसकी किस्मत बदल गई। पहले भी हर्ष फायरिंग और हिंसा के मामलों में नाम दर्ज था। छात्रा की मौत और सबूत मिटाने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया। हाईकोर्ट ने उसकी जमानत खारिज कर दी है।

पुलिस का दावा और जांच की प्रगति

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में गठित एसआईटी ने अब तक 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की है।

  • छात्रा के परिजन समेत 40 लोगों के बयान दर्ज किए गए।
  • पटना और जहानाबाद से कई अहम सबूत जुटाए गए।
  • रेंज आईजी पटना जितेंद्र राणा के नेतृत्व में 40 अफसरों की टीम रात-दिन जांच में लगी हुई है।
  • 65 से ज्यादा जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा चुके हैं।
  • मोबाइल का सीडीआर और डिलीट व्हाट्सएप चैट रिकवर की गई है।

पुलिस का दावा है कि पटना एम्स की सेकेंड ओपिनियन और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद पूरा सच सामने आ जाएगा। लेकिन फिलहाल इस मामले में जवाबों से ज्यादा सवाल हैं और बिहार की निगाहें इस पूरे केस पर टिकी हुई हैं।

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