दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के हालिया बयान पर कड़ा एतराज़ जताया है। उन्होंने मदनी के उस बयान को “गैर–जिम्मेदाराना और भ्रामक” बताया, जिसमें मदनी ने कथित रूप से कहा था कि मुस्लिम किसी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर नहीं बन सकते।
शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद एक इतिहास–सम्पन्न संस्था है जिसने देश की आज़ादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे संगठन के प्रमुख से इस तरह का बयान आना बेहद निराशाजनक है।
उन्होंने कहा—
“अरशद मदनी का बयान बहुत गैर जिम्मेदाराना है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे ऐसा बयान दें। उन्हें मालूम होना चाहिए कि भारत का मुसलमान भारत का राष्ट्रपति बन सकता है, क्रिकेट या हॉकी टीम का कप्तान बन सकता है, एयर चीफ मार्शल बन सकता है। भारत का मुसलमान हर वह पद पा सकता है, जिसका अधिकार संविधान ने उसे दिया है।”
भाजपा नेता ने आगे कहा कि देश में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जब मुस्लिम समुदाय के लोग सर्वोच्च संवैधानिक और सैन्य पदों पर पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि मदनी का यह दावा कि मुसलमान को वाइस चांसलर बनने से रोका जाता है, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान दोनों का अपमान है।
शाहनवाज़ ने यह भी कहा कि ऐसे बयान समाज में अनावश्यक भ्रम पैदा करते हैं और मुस्लिम समुदाय के युवाओं के मन में हीन भावना भरते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा—
“अरशद मदनी को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।”
मदनी के बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल है। भाजपा इसे मुस्लिम समाज को भ्रमित करने की कोशिश बता रही है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर अभी तक चुप्पी साधे हुए है।
बहरहाल, शाहनवाज़ हुसैन के इस तीखे बयान के बाद मामला और गरमाने की पूरी संभावना है।

















