खनन विभाग की सख्ती और सरकार के सख्त फरमानों के बावजूद गंडक नदी आज भी रेत माफियाओं की जागीर बनी हुई है। सरकार की नज़रों के नीचे, प्रशासनिक सरपरस्ती और अफ़सरशाही की कथित मिलीभगत से उजली बालू का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।

गोविन्दगंज से लेकर मलाही तक गंडक नदी की धारा में हर रात कानून की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रेत के सौदागर बेखौफ होकर जेसीबी मशीनों और हवाइयों के दम पर नदी की छाती चीर रहे हैं।

सरकार बार-बार ऐलान कर चुकी है कि अवैध बालू खनन पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। मंत्री से लेकर वरीय अधिकारी तक बैठकों और फाइलों में सख्त निर्देश जारी कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आ रही है।
ताज़ा मामला उस वायरल वीडियो से सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तूफान की तरह फैल रहा है। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक नहीं बल्कि चार-चार हवाइयां और जेसीबी मशीनें एक साथ गंडक नदी में अवैध खनन में जुटी हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो गोविन्दगंज घाट का है।

वीडियो में स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं, जो इस गैरकानूनी धंधे का विरोध करते नजर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के समय गंडक नदी पहले ही भारी तबाही मचाती है, और अब आठ फीट तक गहरी खुदाई भविष्य में और बड़ी तबाही को न्योता दे सकती है। ग्रामीणों की आवाज़ में खौफ और गुस्सा दोनों साफ झलकता है।
हालांकि न्यूज़4 नेशन इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन वीडियो में दिख रहा खुल्लमखुल्ला अवैध खनन प्रशासन की कथित बेखबरी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि यह पूरा खेल अफ़सरों की नाक के नीचे चल रहा है, या फिर नाक के नीचे नहीं, बल्कि इशारों पर?
इस पूरे मामले में जब जिला खनन पदाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो फोन रिसीव नहीं हुआ। वाट्सएप पर भेजे गए संदेश का भी कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में सवाल लाज़िमी है—
क्या सिस्टम सो रहा है, या फिर रेत के इस काले कारोबार में किसी की चुप्पी भी हिस्सेदारी बन चुकी है?
















