नई दिल्ली: देश में 1 अप्रैल 2026 से नए श्रम कानून लागू होने की संभावना है, जिससे कर्मचारियों और कंपनियों के कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने 44 पुराने श्रम कानूनों को सरल बनाकर चार प्रमुख कोड में समेट दिया है, जिन्हें अब लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
इन चार कोड में Code on Wages 2019, Social Security Code 2020, Industrial Relations Code 2020 और Occupational Safety Health and Working Conditions Code 2020 शामिल हैं। इनका उद्देश्य श्रम कानूनों को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
नए नियमों के अनुसार, काम के घंटे फिलहाल 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे साप्ताहिक ही रहेंगे, लेकिन कार्य व्यवस्था को पहले से अधिक लचीला बनाया जाएगा। कंपनियां अब कर्मचारियों को फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑप्शन दे सकेंगी, जिससे काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बेहतर हो सकेगा।
ओवरटाइम के नियमों को भी व्यवस्थित किया गया है, ताकि कर्मचारियों को अतिरिक्त काम के लिए उचित भुगतान मिल सके। इससे कंपनियों को भी जरूरत के अनुसार कार्य प्रबंधन करने में आसानी होगी।
सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक करीब 100 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। फिलहाल यह संख्या लगभग 94 करोड़ के आसपास है। नए कोड के तहत असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और स्वरोजगार करने वाले लोगों को भी शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा, सभी कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा और “समान काम के लिए समान वेतन” सुनिश्चित किया जाएगा। महिलाओं को सुरक्षा प्रबंधों के साथ सभी शिफ्टों में काम करने की अनुमति मिलेगी।
40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे उनके स्वास्थ्य का बेहतर ख्याल रखा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए श्रम कानून अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं, जिससे उद्योगों को काम के उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलेगी और कर्मचारियों को भी बेहतर मुआवजा और सुरक्षा मिलेगी।

















